Tuesday, January 8, 2013

खतना -- प्रश्‍न : मुस्लिम,यहूदी और इसाईयों में की जाने वाली लिंग की circumcision क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य के हिसाब से ठीक है ।

खतना यानि नकाब कुशाई, सुन्‍दर और सुरक्षित रखने का आसान  तरीका, जिसे तीन धर्मों वाले लाभान्वित हो रहे हैं,,,दुनिया में इन्‍हीं तीनों धर्मों से अधिकतर समझदार होते हैं,,,इन्‍हीं का दुनिया पर कब्‍जा है,, इन तीनों धर्मों अर्थात यहूदी, इसाई और इस्‍लाम का संयुक्‍त नाम इब्राहीमी धर्म Abrahamic religions है
बच्‍चे की नाल काटी जाती है, जिसकी पैदा होने के बाद कोई आवश्‍यकता नहीं इसी तरह यह मामूली और नाजुक सी झिल्‍ली हटाई जाती है,, जिस कारण इन तीन धर्मों वालों का वो बेहद सुन्‍दर हो जाता है

उत्तर ---
पुरूषों का खतना उनके शिश्न की अग्र-त्वचा (खलड़ी) को पूरी तरह या आंशिक रूप से हटा देने की प्रक्रिया है. 

यहूदी संप्रदाय में पुरूषों का धार्मिक खतना ईश्वर का आदेश माना जाता है.[5] इस्लाम में, हालांकि क़ुरान में इसकी चर्चा नहीं की गई है, लेकिन यह व्यापक रूप से प्रचलित है और अक्सर इसे सुन्नाह (sunnah) कहा जाता है.[6] यह अफ्रीका में कुछ ईसाई चर्चों में भी प्रचलित है, जिनमें कुछ ओरिएण्टल ऑर्थोडॉक्स चर्च भी शामिल हैं.[7]विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) (डब्ल्यूएचओ) (WHO) के अनुसार, वैश्विक आकलन यह सूचित करते हैं कि 30% पुरूषों का खतना हुआ है, 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (The World Health Organization) (डब्ल्यूएचओ; 2007) (WHO; 2007), एचआईवी/एड्स पर जॉइन्ट यूनाईटेड नेशन्स प्रोग्राम, (Joint United Nations Programme on HIV/AIDS) (यूएनएड्स; 2007) (UNAIDS; 2007), और सेंटर्स फॉर डिसीज़ कण्ट्रोल एण्ड प्रीवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) (सीडीसी; 2008) (CDC; 2008) कहते हैं कि प्रमाण इस बात की ओर संकेत करते हैं कि पुरूषों में खतना करना शिश्न-योनि यौन संबंध के दौरान पुरूषों द्वारा एचआईवी (HIV) अभिग्रहण के खतरे को लक्षणीय रूप से कम कर देता है, 

प्रश्‍न : मुस्लिम लोगों में की जाने वाली लिंग की खतना क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य के हिसाब से ठीक है । 
उत्‍तर : खतना न केवल मुस्लिम में बल्कि काफी सारे दूसरे धर्मों में भी होती है । तथा खतना का स्‍वास्‍थ्‍य के हिसाब से बहुत सारे फायदे हैं । सबसे पहला तो ये ही है कि खतना करवाने के बाद लिंग के ऊपर की जो चमड़ी है वो लिंग के आगे के मुंड पर चढ़ी हुई नहीं रहती है । जिसके कारण लिंग में इन्‍फेक्‍शन होने का खतरा बिल्‍कुल कम हो जाता है । दरअसल में ये जो चमड़ी है ये जब लिंग के आगे के मुंड पर चढ़ी रहती है तो वहां पर सडांध पैदा करती है । एक दो दिन में वहां पर एक सफेद पनीर जैसा बदबूदार पदार्थ जामा हो जाता है जो कि लिंग पर इन्‍फेक्‍शन पैदा कर देता है । जब खतना हो जाती है तो चमड़ी नीचे गिर जाती है और जिसके कारण वो बदबू पैदा होना तथा पनीर जमने की संभावना खत्‍म हो जाती है । दूसरा फायदा ये है कि कई बार संभोग करते समय जब लिंग को अंदर प्रवेश करवाया जाता है तो ये चमड़ी पीछे हटते हुए कट जाती है । यदि छेद टाइट होता है तो ऐसा होता है । चमड़ी कट जाने के कारण कई दिनों तक संभोग करने में असहनीय दर्द होता है । यदि खतना की हुई है तो ये सारी परेशानियां कम हो जाती हैं । डाक्‍टरों के अनुसार खतना होने के बाद लिंग की चमड़ी का केंसर होने की संभावना भी कम हो जाती है । आजकल खतना अस्‍पतालों में आपरेशन थियेटर में बाकायदा सर्जन के द्वारा की जाती हैं । इसलिये इसमें पहले की तरह पकने या दूसरी परेशानियां कम हो गई हैं । खतना करवाना एक प्रकार से अपने लिंग को सुरक्षित करना है इन्‍फेक्‍शन के खतरे से । कुछ शोध कहते हैं कि खतना करवाने के बाद एडस का खतरा भी कम हो जाता है । 

लड़के अपने लिंग की आगे की चमड़ी के साथ जन्म लेते हैं - वह चमड़ी जो लिंग मुंड को ढके रहती है। जब किसी लड़के या पुरुश का खतना किया जाता है, तो उनके लिंग के आगे की चमड़ी निकाल दी जाती है और लिंग मुंड दिखने लगता है।
खतना कई कारणों से किया जाता है। इसका संबंध किसी खास धर्म, जातीय (एथ्निक समूह) या जनजाति से हो सकता है। माता-पिता अपने बेटों का खतना, साफ-सफाई या स्वास्थ्य कारणों से भी करा सकते हैं।

चित्रः बायीं ओरः बिना खतना किया गया लिंग; दाहिनी ओरः खतना किया गया लिंग

विष्व में पुरुष खतना का अनुपात
विष्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि पूरे विश्‍व व के 30 प्रतिशत पुरुषों का खतना हुआ है। कुछ समुदायों जैसे कि यहूदियों और मुसलमानों के लगभग सभी पुरुषों का खतना किया जाता है।

खतना कराने के क्या फायदे हैं?
जिन पुरषों का खतना नहीं किया गया है, उनकी तुलना में खतना कराए पुरुषों में इन बातों का कम जोखिम होता हैः

ऽ पेशाब की नली का संक्रमण (इन्फेक्षन)
 एचआईवी
ऽ सिफलिस
ऽ सेक्स से होने वाली शैन्क्राॅयड नामक बीमारी
वैज्ञानिकों का मानना हैं कि खतना किए गए पुरुषों  में संक्रमण का कम जोखिम होता है क्योंकि लिंग की आगे की चमड़ी के बिना कीटाणुओं के पनपने के लिए नमी वाला माहौल नहीं मिलता है।
एक मान्यता यह है कि खतना किए गए लिंग का मुंड कम संवेदनशीलल होता है, इसलिए पुरुष वीर्यपात से पहले अधिक समय तक संभोग (सेक्स) कर सकते हैं।

चाहे आपका खतना हुआ हो या नहीं, आपको रोज़ अपने लिंग को साफ करना चाहिए।
यदि आपका खतना नहीं हुआ है, तो लिंग की आगे की चमड़ी को धीरे से पीछे खिसकाएं और गुनगुने पानी से लिंग मुंड को धोएं। लिंग के दंड के लिए साबुन का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन आगे की चमड़ी के नीचे सफाई के लिए साबुन का प्रयोग करना ठीक नहीं होगा।
साबुन से बैक्टीरिया के प्राकृतिक संतुलन में गड़बड़ी आ सकती है और जिसके कारण आपको फफूंदी वाले संक्रमण (फंगल इन्फेक्षन) होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि आप अपने लिंग मुंड को साबुन से धोने का फैसला करते हैं, तो किसी हल्की सुगंध वाले सौम्य साबुन का प्रयोग करें।
स्मेग्मा को धोकर साफ करना ज़रूरी है। यह, सफेद या पीलापन लिए चिपचिपा पदार्थ होता है, जो त्वचा से निकलने वाले तेल और मृत त्वचा कोशिकाओं से बना होता है। इसका बनना पूरी तरह स्वाभाविक है, लेकिन यह आपके लिंग की आगे की  चमड़ी के नीचे जम सकता है, बदबू फैला सकता है, खुजली और संक्रमण कर सकता है।

सृष्टिकर्ता ने मनुष्य को नंगा पैदा किया है, इसका मतलब यह तो हरगिज़ नहीं है कि मनुष्य कपड़े ना पहने, नंगा ही जिये, नंगा ही मरे, गंदा पैदा होता है, गंदा ही रहे। नाखून और बाल आदि भी न कटवाए।
Arya Samaj - ख़तना और पेशाब



जिम्बाब्वे में पुरष सांसदों का खतना होगा

डरबन। जिम्बाब्वे के पुरष सांसदों का खतना किया जाएगा। ऎसा एच.आई.वी और एड्स की रोकथाम के अभियान के तहत किया जाएगा। उप प्रधानमंत्री थोकोजानी खुपे ने जानकारी देते हुए बताया कि 150 सदस्यौं वाली जिम्बाब्वे की संसद के पुरूष सदस्यों और शहरी एवं ग्रामीण परिषदों के पुरूष सदस्यों को एक छोटे ऑपरेशन से गुजरना होगा। थोकोजानी ने बताया कि देश में एच.आई.वी के प्रसार को रोकने के मकसद से सरकार ने यह योजना बनाई है। शोधकर्ताओं के अनुसार जिन पुरूषों का खतना होता है, उनमें एड्स होने की संभावना आठ गुना तक कम हो जाती है

हिंदुओं के मुकाबले मुसलमान महिलाओं में कैंसर कम

अध्ययन में पाया गया कि 30 से 69 वर्ष के पुरुषों की मौत की मुख्य वजह मुंह, पेट और फेफड़े का कैंसर था. वहीं औरतों की मौत की मुख्य वजह गर्भाशय, पेट और स्तन का कैंसर था.
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/03/120328_cancer_mortality_sdp.shtml







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